राज्यों में बनें डिटेंशन सेंटर का सच/ असम के 6 कम्पों में 970 लोग,पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार 4 बार निर्देश दिए गए 

राज्यों में बनें डिटेंशन सेंटर का सच/ असम के 6 कम्पों में 970 लोग,पिछले 10 सालों में केंद्र सरकार 4 बार निर्देश दिए गए 

नागरिकता संशोधन कानून पर देश के अलग-अलग इलाकों में विरोध प्रदर्शन, पीएम मोदी ने अफवाहों पर चेताया

दरअरसल, पूरे देश में ये अफवाह फैलाई जा रही है कि मुस्लिमों को कुछ चिह्नित जगहों पर भेज दिया जाएगा

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर राज्यों में बने डिटेंशन सेंटर और जेल में क्या फर्क है? इसे लेकर क्यों है उबाल

असम में एनआरसी निवासियों की एक सूची है जिससे ये पहचान की जा सकती है कि कौन यहां का मूल निवासी है और अवैध शरणार्थी का पता लगाया जा सकता है। असम में पहली बार 2005 में तरुण गोगोई की कांग्रेस सरकार ने डिटेंशन सेंटर बनाए थे।

नई दिल्ली. नागरिकता कानून और एनआरसी पर चल रहे विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने डिटेंशन सेंटर को लेकर अलग-अलग बातें कीं। वहीं, सरकार के आंकड़े बताते हैं कि असम में 6 डिटेंशन सेंटर हैं, जिनमें 900 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। जनवरी 2019 में गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने यहां कम से कम एक डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए मैनुअल जारी किया था। देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को रखने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाने की बात नई नहीं है। 2009 के बाद से 4 बार राज्य सरकारों को ऐसे डिटेंशन सेंटर बनाने के निर्देश जारी

असम में 6 डिटेंशन सेंटर, कर्नाटक में एक
गोलपाड़ा, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, सिलचर और कोकराझार। इन्हें जिला जेलों के अंदर ही बनाया गया है, जहां 988 लोगों को रखा जा सकता है। मतिया में सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है, जहां एक साथ 3000 लोग रखे जा सकते हैं। कर्नाटक में एक सेंटर है। मुंबई में भी एक डिटेंशन सेंटर खोलने की योजना है। इस साल के शुरू में बंगाल सरकार ने भी न्यू टाउन और बोनगांव में डिटेंशन सेंटर खोलने की रजामंदी दे रखी है। गोवा और दिल्ली में भी एक-एक सेंटर हैं।

असम में 6 डिटेंशन सेंटर, कर्नाटक में एक
गोलपाड़ा, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़, सिलचर और कोकराझार। इन्हें जिला जेलों के अंदर ही बनाया गया है, जहां 988 लोगों को रखा जा सकता है। मतिया में सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर बनाया जा रहा है, जहां एक साथ 3000 लोग रखे जा सकते हैं। कर्नाटक में एक सेंटर है। मुंबई में भी एक डिटेंशन सेंटर खोलने की योजना है। इस साल के शुरू में बंगाल सरकार ने भी न्यू टाउन और बोनगांव में डिटेंशन सेंटर खोलने की रजामंदी दे रखी है। गोवा और दिल्ली में भी एक-एक सेंटर हैं।

क्या डिटेंशन सेंटरों को जेल कहा जा सकता है?
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जेलों और डिटेंशन सेंटर के बीच अंतर जरूरी है। जेल में अपराध की सजा भुगत रहे लोग रहते हैं, जबकि डिटेंशन सेंटर में लोग फैसले का इंतजार कर रहे होते हैं कि वे देश में रहने पाएंगे या नहीं। केंद्र सरकार ने जनवरी में सभी राज्यों को मॉडल डिटेंशन सेंटर मैन्युअल भेजकर तमाम सुविधाएं स्थापित करने को कहा था। इनमें स्किल सेंटर, बच्चों के लिए क्रेच और पकड़े गए विदेशियों को उनके मिशन/दूतावासों/कौंसुलेट या परिवारों से संपर्क करने के लिए सेल बनाना शामिल था। इस साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने डिटेंशन सेंटर में तीन साल बिता चुके लोगों को जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया था।


तीन साल में डिटेंशन सेंटर में रह रहे 28 लोगों की मौत

27 नवंबर 2019 को तृणमूल सांसद डॉ. शांतनु सेन के सवाल के जवाब में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में जवाब दिया था- 2016 से 13 दिसंबर 2019 तक असम में डिटेंशन सेंटर में रह रहे 28 लोगों की मौत हुई है। इन लोगों की मौत या तो डिटेंशन सेंटर में हुई है या इन्हें जिन अस्पतालों में भेजा गया था, वहां हुई है